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१२ जेष्ठ २०७९, बिहीबार
(June 12, 2017)

‘सामाजिक उत्तरदायित्वका लागि पत्रकारिता’

राजपालाई डा.सीके राउतको पत्र : बहिस्कारको शैली परिवर्तन गर्न आग्रह

काठमाडौं । स्वतन्त्र मधेश गठबन्धनका संयोजक डा.सीके राउतले राष्ट्रिय जनता पार्टीका नेता महन्थ ठाकुरलाई पत्र लेखी मतपत्रको कोठाभन्दा बाहिर मतदान गरेर निर्वाचन बहिस्कार गर्न आग्रह गरेका छन् ।

आइतबार साँझ डा.राउतद्धारा जारी गरिएको पत्रमा राजपाले आन्दोलन घोषणा गरेकोप्रति आभार पनि व्यक्त गरिएको छ । डा.राउतले निर्वाचनको बहिस्कार गरेकोमा राजपालाई धन्यवाद दिदै बहिस्कारको शैली परिवर्तन गर्न आग्रह गरेका छन् ।

निर्वाचन बहिस्कार गर्दा यसअघि पनि मधेशीहरुलाई फाईदा नभई घाटा भएको बताउँदै डा.राउतले कोठाभन्दा बाहिर मोहर लगाएर निर्वाचन बहिस्कार गर्दाका फाईदाहरु बताएका छन् ।

डा.राउतले तीन वटा बुँदामा लेख्दै सडकमा आन्दोलन गरेर मधेशीहरुको हत्या नगराउनसमेत आग्रह गरेका छन् ।

डा.राउतद्धारा राजपालाई पठाइएको पत्र :

श्री महन्थ ठाकुर
राष्ट्रीय जनता पार्टी, नेपाल

विषय: मतपत्र में “कोठरी बाहर मोहर” लगाके निर्वाचन को सक्रिय बहिष्कार करने हेतु सहकार्य के लिए अपील

आदरणीय ठाकुर जी,

राष्ट्रीय जनता पार्टी, नेपाल द्वारा मधेश आंदोलन को जारी रखते हुए, संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चा द्वारा नेपाल सरकार समक्ष २०७२ साल कार्तिक १५ गते पेश की गई समग्र मधेश–दो-स्वायत्त प्रदेश, सुरक्षा निकाय और अदालत सहित राज्य के सम्पूर्ण अंग में समानुपातिक समावेशी की व्यवस्था, जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्र/प्रतिनिधि निर्धारण, तथा वैवाहिक नागरिकता का प्रावधान अन्तरिम संविधान अनुसार होने लगायत की ११-सूत्रीय माँगें पूरी नहीं होने तक, नेपाल सरकार द्वारा किए जाने वाले कोई भी निर्वाचन को बहिष्कार करने का निर्णय स्वागत-योग्य है और इस दृढ़ निर्णय के लिए राष्ट्रीय जनता पार्टी, नेपाल को हम सभी आभार व्यक्त करते हैं।

जहाँ तक निर्वाचन को बहिष्कार करने का सवाल है, उसके लिए तरीका भिन्न-भिन्न हो सकता हैं और हर एक के अपने फायदे और बेफायदे भी हैं।

(१) निषेधात्मक एवं हिंसात्मक बहिष्कार: बल प्रयोग, हिंसा, तोडफोड़ आदि लगायत के हिंसात्मक एवं निषेधात्मक माध्यम द्वारा निर्वाचन बहिष्कार करना मधेशी जनता और मधेश के हित में नहीं है। इससे पहले भी नेपाल में विभिन्न सशस्त्र एवं संगठित समूह द्वारा निर्वाचन बहिष्कार किया गया था, पर वे निर्वाचन को होने से रोक नहीं सके। ज्यादा से ज्यादा १-२ बूथ पर ही उनका कोई प्रभाव रहा। उनकी कोई ठोस उपलब्धि नहीं रही। उसी तरह, इससे पहले २०७२ साल में संविधान के लिए सुझाव संकलन के समय में भी मधेशी पार्टियाँ द्वारा बहिष्कार किया गया था, तो भी सुझाव संकलन हुआ ही और संविधान भी जारी हुआ। तो पूरी नेपाली सेना और देश भर से सुरक्षाकर्मियों को मधेश में उतार देने के बाद, नेपाल सरकार मधेश में निर्वाचन कराने में सफल होना निश्चित प्राय है। दूसरी बात, ऐसे निषेधात्मक और हिंसात्मक तरीका को अपनाना कहीं न कहीं इस बात का संकेत है कि ऐसे समूह लोकतान्त्रिक व्यवस्था पर भरोसा नहीं रखते या इनका जनसमर्थन कम होने के कारण इन्हें हिंसा और बल प्रयोग पर उतरना पड़ा। यह अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर भी मधेशी जनता की तरफ से अच्छा संदेश नहीं होगा और ऐसे प्रतिरोध को कोई अन्तरराष्ट्रीय समर्थन भी नहीं मिलेगा। तीसरी बात, ऐसे प्रतिरोध में कोई ठोस आँकड़े नहीं होते कि कितने प्रतिशत जनता ने निर्वाचन को अस्वीकार किया। तो साफ है, यह रास्ता न तो मधेश के हित में हैं, न तो निर्वाचन को पूर्णत: रोक ही सकता है।

(२) निष्क्रिय बहिष्कार — अर्थात् निर्वाचन में मतदान करने ही नहीं जाना। इस विकल्प में सब से बड़ी बात है प्रभावकारिता की। क्योंकि मतदान करने के मनोभाव, परिस्थिति और बाध्यता को रोकना आसान नहीं होता। इसलिए विगत में भी किए गए ऐसे बहिष्कार प्राय: असफल रहा है। इस तरह से बहिष्कार करने पर भी निर्वाचन हुआ ही है और परिणाम आया ही है। इसके अलावा ऐसी मौनता या तटस्थता से “मौन सम्मति लक्षणम्” अर्था्त नेपाल के काला संविधान और निर्वाचन के प्रति सहमति मानी जाएगी, विरोध नहीं। अन्तरराष्ट्रीय समुदाय यह आरोप लगाएंगे कि ऐसे बहिष्कार करनेवाले समूह अल्पमत में है, उनका ज्यादा समर्थन नहीं है, इसलिए उन्होंने निर्वाचन को चूपचाप बहिष्कार किया। अन्तरराष्ट्रीय समुदाय यह भी आरोप लगाएंगे कि ऐसे समूह लोकतान्त्रिक पद्धति पर विश्वास नहीं रखते। इसके साथ-साथ, निर्वाचन के समय में ऐसा माहौल बनता है, रिश्तेनाते इस तरह वोट खसाने के लिए पकडकर ले जाते हैं, पार्टियाँ इस तरह से ह्वीप जारी करती हैं, कि उस समय जो आदमी चलफिर भी नहीं सकते, बीमार रहते हैं, वे भी मतदान करने के लिए जाते ही हैं। इसलिए मतदान करने के मनोभाव और परिस्थिति को रोकना सहज नहीं होता, और इसलिए यह तरीका निष्प्रभावी हो जाता है।

(३) सक्रिय बहिष्कार — निर्वाचन में भाग लेकर “मतबदर” करना / लोकतान्त्रिक “राइट टू रिजेक्ट” का प्रयोग करना। यह सबसे बेहतरीन तरीका है, क्योंकि यह राष्ट्रीय तथा अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को आँकडा सहित ठोस संदेश देगा कि मधेशी जनता लोकतान्त्रिक व्यवस्था पर भरोसा रखती है, परन्तु नेपाल का काला संविधान और उसे संस्थागत करने के लिए किए जा रहे निर्वाचन मधेशियों को स्वीकार नहीं। यह सशक्त संदेश है कि मधेशी जनता चुप रहकर घर में छुपने वाली भी नहीं हैं, सब कुछ सहकर खामोश रहने वाली भी नहीं है, बल्कि मधेशी जनता अभी भी सक्रिय हैं, सजग हैं, ऊर्जाशील है और मधेश आंदोलन जारी है। जो जनता मधेश आंदोलन के प्रति सद्‍भाव रखती है परन्तु अपनी पार्टी की ओर से कार्रवाई के डर से, पार्टी ह्वीप के कारण से, अपने रिश्तेनातों के कारण से खुलकर मधेश आंदोलन में सहभागी नहीं हो पाती, मतदान गोप्य होने के कारण, वे लोग भी इस मुहिम में सहभागी होकर अपना “मतबदर” करके मधेश आंदोलन के प्रति एकबद्धता दिखा सकते हैं। इस मार्ग के जरिए ५०% से ज्यादा मतबदर करके नेपाल के काला संविधान को नहीं स्वीकारने के जनमत-संग्रह के रुपमें सशक्त और ठोस संदेश दे सकते हैं, जिस संविधान को नेपाल सरकार ९५% से ज्यादा जनता का समर्थन प्राप्त होने का दावा करती आई है। यह नेपाली सेना और पुलिस लगाकर जबरदस्ती मधेशियों पर संविधान लादने और निर्वाचन करानेवाले नेपाली शासकों के मुँह पर जोड़दार तमाचा है। यह निर्वाचन के अवसर को आन्दोलन के रुप में ग्रहण करते हुए, लोकतान्त्रिक “राइट टू रिजेक्ट” का अधिकार प्रयोग करते हुए, नेपाली सेना और पुलिस के घेरा में जाकर, उसी का मतपत्र प्रयोग करके, शांतिपूर्ण तरीका द्वारा मतबदर करके ही, नेपाल सरकार को कड़ा, वैधानिक तथा आँकडायुक्त जवाब देना है। मधेशियों का अधिकार छीननेवाले और मधेशी पर गुलामी लादने वाले नेपाल के काला संविधान को लागू होने से रोकने या खारिज करने का जो काम डेढ-दो वर्ष से जारी सड़क आन्दोलन नहीं कर सका, घनघोर नाकेबन्दी नहीं कर सकी, ६० शहिदों की बलिदानी नहीं कर सकी, सैकडों जुलूस और सभाएँ नहीं कर सकीं, वह काम “कोठरी के बाहर मोहर” मारकर मतबदर द्वारा आसानी से, शांतिपूर्ण तरीका से किया जा सकता है, यह तरीका एक ऐसा “मास्टर स्ट्रोक” है। यह समग्र मधेशी जनता और शहीद को विजय दिलाने में सफल होनेवाला ब्रह्मास्त्र है।

इसलिए, ऊपर की बातों को मध्यनजर करते हुए, वीर मधेशी शहीदों को साक्षी मानकर, समग्र मधेशी जनता की भलाई के लिए हम आपसे विनम्र आग्रह करना चाहते हैं कि जो निर्वाचन बहिष्कार करने का लक्ष्य आपकी पार्टी ने लिया है, उसमें सक्रिय बहिष्कार अर्थात् मतपत्र में “कोठरी बाहर मोहर” लगाकर मतबदर करके निर्वाचन को बहिष्कार करने के तरीका को अपनाया जाएँ। आपके सहकार्य से, हमें पूरा विश्वास है कि आनेवाले निर्वाचन में बहुमत मधेशी जनता मतबदर करके नेपाली शासकों के षड्यन्त्र को असफल बनाएगी, और मधेशी जनता का ही विजय होगा।

आपका,

डा. सी. के. राउत
संयोजक, स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन
इमेल: [email protected]

प्रकाशित मिति: Jun 12, 2017

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